पिछले 4 दिन खुशियाँ कम गम ज्यादा

महामूर्खराज की कलम से   पिछले 4 दिनों मे जो हुआ शायद मेरे जीवन के सबसे कठिनतम पलों मे था। अपनी आँखों से टुकुर टुकुर सपनों के उन हवाई महलों को ध्वस्त होते देखता रहा। कई बार पहले भी ऐसा हो चुका है पर फर्क सिर्फ इतना है इस बार जाग रहा था और पहले नींद  मे रहता था। 14... [पूरी पोस्ट]
writer महामूर्खराज
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[17 Apr 2010 10:09 AM]

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