यह सब तो होता रहता है
त्राहि माम् की आवाजों से ।और कालिया की आहों से ॥गूँज गया सब कोना कोना ।गब्बर ने सुन रोना-धोना ॥समझा सब माज़रा सहज ही ।मँगा कालिया का कागज़ भी ॥उसको साँबा से बुलवाया ।बड़े प्यार से यूँ समझाया ॥"ये सब तो होता रहता है ।कहने दो कोई कहता है ॥अपना काम रखो...
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विवेक सिंह
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[17 Apr 2010 09:42 AM]



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