सोसायटी की सुरक्षा खतरे में है – रवि कुमार

सृजन और सरोकार सोसायटी की सुरक्षा कितनी खतरे में है ( यह कविता तो शायद कतई नहीं है ) सब बढिया चल रहा है रसोई ठीक है संतुलित आहार प्रदान का कल्पवृक्ष पत्नी लगभग खुश है गहनों और साड़ियों के नये चलन आनंद के वायस बनकर उभरते हैं आपसी समझदारी की ज़िंदा मिसाल ठंड़ में गर्म और... [पूरी पोस्ट]
writer रवि कुमार, रावतभाटा

कविताख़तरा

views
30
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
10
[17 Apr 2010 09:19 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix