बौद्धिक साम्राज्यवाद और किस्सा-ए-प्रोफ़ेसर रिछारिया : सुनील
15 अगस्त, 1947 को भारत आजाद तो हो गया, किन्तु भारतीय दिमाग गुलामी से मुक्त नहीं हो पाया। इस दिमागी गुलामी को बनाए रखने का काम हमारे विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं और उनको मदद करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेन्सियों के जरिये चलता रहा। हमारा ज्ञान, हमारे...
[पूरी पोस्ट]
Aflatoon
31
6
0
6
3
[17 Apr 2010 06:51 AM]



Shuffle








