विश्वास

नारी का कविता ब्लॉग © 2008-10 सर्वाधिकार सुरक्षित! तुम किसी को कुछ भी कहो किसी को डाँटो, प्यार करो पर मैं कुछ न बोलूँमुँह न खोलूँ और बोलने से पहले स्वयं को तोलूँफिर कैसे जीऊँ !समाज की असंगतियाँ और विसंगतियाँ कब होंगी समाप्तकब मिलेगा समान रूप सेजीने का अधिकार, रेत होता... [पूरी पोस्ट]
writer डा.मीना अग्रवाल
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[17 Apr 2010 06:34 AM]

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