शायद कल रफ्तार तेज हो जाये...
कभी-कभी लगता है, जैसे कुछ काम नहीं होगा। लगता है, जैसे अपने बस में कुछ नहीं। सुनते हैं कि बर्नआउट वाले स्टेज में ऐसा होता है। क्या हमने ऐसा कर लिया है क्या? इतना काम कर लिया है? या हमारे पास टॉपिक या यूं कहें मुद्दों की भरमार नहीं है। मैं अब सानिया...
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prabhat gopal
my life
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[17 Apr 2010 04:53 AM]



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