हम पृथ्वी के नमक नहीं....!

डॉ. चन्द्रकुमार जैन हम पृथ्वी के नमक नहींइंसानियत के खमीर हैंहमारी हथेलियों परभाग्य की रेखाएँ नहींअभिशाप के नक़्शे हैंहमारे ह्रदयहमारे मस्तिष्क का अस्तित्व नहींहमकेवल रस ग्रंथियों के समूह नहीं हैं।============================गुरुदेव कश्यप की रचना साभार प्रस्तुत.... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[17 Apr 2010 04:24 AM]

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