खुजलीबाज और उंगलीबाज
खुजलीबाज और उंगलीबाजकई दिनों से कुछ लिखने की फिराक में हूं,लेकिन मेरी लिखने की अभिलाषाओं पर दो तरह के लोग मिलकर ऐसा तुषारापात करते हैं कि भावनाओं की फसल का अंकुर कागज़ पर उतरने के पहले ही मटियामेट हो जाता है...ये दोनो सुकून और शांति के दुश्मन हैं......
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अजित त्रिपाठी
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[17 Apr 2010 03:10 AM]



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