देर तलक क्यूँ रोते हैं शजर

हिन्द-युग्म तुमकिसी पानी की लहर से आयेमेरा रोम रोमअपने नूर से भिगो गएमैं तन्हा, अब तलकतेरी आमद को महसूस कर रही हूँजबकि तुम कब के जा चुकेदर्द बूँद बूँद कर के टूटता हैतो एहसास होता हैबारिश के जाने के बाद देर तलकक्यूँ रोते हैं शजर!!कवयित्री- दीपाली आब... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

deepali aab

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[17 Apr 2010 02:26 AM]

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