पतंजलि योग दर्शन-योगाभ्यास से उत्पन्न विवेक से प्रकाश फैलता है
योगांगनुष्ठानादशुद्धिक्षये ज्ञानदीप्तिराविवेकख्यातेः।।हिन्दी में भावार्थ-योग साधना के द्वारा अंगों का अनुष्ठान करने से अशुद्धि का नाश होने पर जो विवेक का प्रकाश फैलता है उससे निश्चित रूप से ख्याति मिलती है।वर्तमान संदर्भ में संपादकीय व्याख्या-पतंजलि योग...
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दीपक भारतदीप
आध्यात्म
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[17 Apr 2010 01:02 AM]



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