आखिर कब हम इस देश के एक अभिन्न अंग के रूप में देश के रिसते घावों को महसूस करेंगे।
14 अप्रैल की दृष्टिकोण की पोस्ट ‘‘मध्यमवर्गीय बुद्धिजीवी सांड लाल रंग देखकर इतना भड़कते क्यों हैं !’’ कुछ महानुभावों को इस कदर नागवार गुज़री कि उन्होंने हमारे ब्लॉग पर लम्बी लम्बी टिप्पणियों की बौछार के ज़रिए दृष्टिकोण को पूरी तौर पर...
[पूरी पोस्ट]
दृष्टिकोण
32
3
3
0
4
[17 Apr 2010 00:50 AM]



Shuffle








