आज वारिद रो रहे हैं
आज वारिद रो रहे हैं !कुटिल जग की कालिमा निज अश्रुजल से धो रहे हैं ! आज वारिद रो रहे हैं ! देख कर संतप्त भू को पाप ल्वाला में सुलगते,ह्रदय की सद्भावनाएँ वासनाओं में बदलते,विकल होकर आज अपने धैर्य से च्युत हो रहे हैं ! आज वारिद रो रहे हैं ! ध्वंस लीला...
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Sadhana Vaid
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[16 Apr 2010 22:05 PM]



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