ज़न्नत और दोज़ख - सतीश सक्सेना
आज सुबह सुबह प्रवीण शाह का एक लेख के ज़रिये धार्मिक असलियत जान भौचक्का सा रह गया ! यह जानकारी किसी के लिए भी नयी नहीं होगी मगर शायद हम लोग उसपर ध्यान नहीं देते हैं ! प्रवीण भाई ने शायद साफ़ साफ़ हमें बताया कि धर्म से हमें क्या मिल रहा है ...... ऐसा होगा...
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सतीश सक्सेना
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[16 Apr 2010 22:25 PM]



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