हुआ है कैसा तग़ैयुर हवाएं जानती हैं
हुआ है कैसा तग़ैयुर हवाएं जानती हैं।शिकस्ता ख़्वाबों की हालत फ़िज़ाएं जानती है॥ये लड़कियाँ जो बदलती हैं सुबहोशाम लिबास,ये ज़िन्दा रहने की सारी कलाएं जानती हैं॥भरम बना रहे पानी का इन ज़मीनों पर, बरस न पायेंगी हरगिज़ घटाएं जानती हैं॥वो चान्द दूर से रखता है...
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युग-विमर्श
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[16 Apr 2010 21:50 PM]



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