क्यों जाने दिया उसे?

इयत्ता रतन1कोलाहल का तांडवखंडित है नीरवभीड़ चहुंओरभागा-भागी का दौरसब हैं अपने काम में मगनफुरसत नहीं किसी कोपल भर कीसुबह हुई शाम हुईजिंदगी रोज तमाम हुई2जहां थी कोलाहल की आंधीसब कुछ पड़ा है आज मंदखामोश दरो-दीवारेंबे-आवाज जंजीरेंन घुंघरू की छम छमन तबले की थापन... [पूरी पोस्ट]
writer इष्ट देव सांकृत्यायन

कविता

views
15
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
6
[16 Apr 2010 21:05 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix