आजा मौसमे बहार तू कहाँ
आजा मौसमे बहार तू कहाँ | ढूंढ़ते तेरे बागवां ||खुशियों के कोनों से आज राग छू गए ,भूली कहानी से प्राण फिर से आ गए |रंग क्या बदलते है थोड़ी देर देखना ,दास्ताँ बनेगी ये धरा स्वयं तू देखना ||गाफिल न ऐसे खेलेंगे आसमां - और ना रहेंगे मेजबाँ || १ ||उछाला है...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[16 Apr 2010 21:00 PM]



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