किचेन संभालने को शादी…?

टूटी-फूटी मैं जाने कब सुधरुँगी ? सोचती हूँ - भगवान ने जब मुझे बनाया तो पाँच हाथ की ज़बान क्योँ दे दिया…? मिले तो पूछूँ…? क्यों मैं बात-बात पर जवाब दिए बिना नही मानती…? आए दिन किसी न किसी को मेरी बात से परेशानी हो ही जाती है। जबकि मै किसी को परेशान  करना नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer रचना त्रिपाठी

गृहिणी

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[16 Apr 2010 19:56 PM]

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