मनोदशा

उधेड़-बुन लाल रोशनी केदो गोलों के पीछेमैं खुद को इतना सुरक्षित समझता हूँकि60 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रही कार कीस्टीयरिंग व्हील पकड़ेमैंबेगम अख़्तर कीअलसाती हुई ठुमरीबड़ी तन्मयता के साथसुन सकता हूँसुरक्षाअसुरक्षाकल का भयआज की चिंताये सबमनगढ़ंत हैंयापरिवेश के जाए... [पूरी पोस्ट]
writer Rahul Upadhyaya

intense

views
10
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
3
[16 Apr 2010 17:04 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix