कुछ बहुएं भी ना!

मेरी डायरी गंदे कपड़ेजूठे बरतनबूढ़ी सास के आगे पटकसहेली के साथ फिल्म देखने निकलीमिसेज शर्मापरदे परबहू के सास पर अत्याचार देखफूट-फूट कर रोईसहेली के कंधे पर सिर रखकरसिसकते हुए बोली-कुछ बहुएं भी ना!-शिवराज गूजर... [पूरी पोस्ट]
writer shivraj gujar

रचना संसार

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[16 Apr 2010 12:32 PM]

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