॥ हे बिटिया॥

जनपद (मुंडारी लोकगीत का काव्यांतर : सात)हे बिटिया,जब तुम्हारा जन्म हुआबुंडू शहर जंगल से घिरा हुआ थातुम जब बच्ची थीलबालब पानी भरा था चुआं में।हे बिटिया,जबतक तू चंचल किशोरी हुईबुंडू का जंगल उजड़ गयाजबतक तू हुई जवानचुआं का पानी सूख गया।... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[16 Apr 2010 11:44 AM]

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