देह की दुकानें

deehwara --------------------------दर्द उधार नहीं लेतीं देह की दुकानें हैं उसूल पर चलती हैं.अनुसूया की मर्यादा द्रोपदी की दृढ़ता और सीता का सतीत्व पुते हैं सब लिपस्टिक की परतों में .चमकदार झलर-मलर कपड़ों के भीतरकाजल से काले हैंआगत  के... [पूरी पोस्ट]
writer prkant

दर्द

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[16 Apr 2010 10:34 AM]

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