मौसम दहक रहा है...
मौसम दहक रहा है... आसमान से आग बरसातीसूरज की तेज़ किरणें...बदन को और झुलसाते लू के गरम झोंके...गुलमोहर की शाखों पर दहकते फूलों के सुर्ख़ गुच्छे...सूनी गलियों में बंजारन ख्वाहिशों-सी भटकती आवारा दोपहरें...दूधिया चांदनी मेंमोगरा-सी महकती सुलगती...
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फ़िरदौस ख़ान
नज़्म
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[16 Apr 2010 10:20 AM]



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