रण बांकुरा

Shikha Deepak पहले पहल घबराता था हृदयजीवन की कठिनाइयों सेसहमी सहमी सी मैं डर जाती थीकभी कभी अपनी ही परछाइयों सेलगता था जीवन पथ मुश्किल हैमैं पार नहीं कर पाऊंगीमन के इस भय रूपी दानव परकभी मैं वार नहीं कर पाऊंगीयह भय बन कर दरियामुझे डुबाता चला गयाजब कुछ सूझा ना मैं... [पूरी पोस्ट]
writer Shikha Deepak
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[13 Apr 2010 10:20 AM]

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