द्विजेन्द्र द्विज जी की ताज़ा ग़ज़ल और तरही मिसरा

आज के ग़ज़लकार और ग़ज़ल. द्विजेन्द्र द्विज जी की एक ताज़ा ग़ज़ल आप सब की नज़्र कर रहा हूँ। द्विज जी से तो सब लोग वाकिफ़ ही हैं। आप उनकी ग़ज़लें कविता-कोश पर यहाँ पढ़ सकते हैं। उनकी एक नई ग़ज़ल मुलाहिज़ा कीजिए-ग़ज़लमिली है ज़ेह्न—ओ—दिल को बेकली क्याहुई है आपसे भी दोस्ती क्याकई आँखें यहाँ... [पूरी पोस्ट]
writer सतपाल ख़याल
views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
14
[16 Apr 2010 08:00 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix