द्विजेन्द्र द्विज जी की ताज़ा ग़ज़ल और तरही मिसरा
द्विजेन्द्र द्विज जी की एक ताज़ा ग़ज़ल आप सब की नज़्र कर रहा हूँ। द्विज जी से तो सब लोग वाकिफ़ ही हैं। आप उनकी ग़ज़लें कविता-कोश पर यहाँ पढ़ सकते हैं। उनकी एक नई ग़ज़ल मुलाहिज़ा कीजिए-ग़ज़लमिली है ज़ेह्न—ओ—दिल को बेकली क्याहुई है आपसे भी दोस्ती क्याकई आँखें यहाँ...
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सतपाल ख़याल
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[16 Apr 2010 08:00 AM]



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