प्यासा रहता है

वीर की कलम से कोई सहरा में बूँद ढूँढता है, कहीं सागर भी प्यासा रहता है| कहीं चार लम्हें जिंदिगी बन जाते हैं, कहीं कोई बरसों पल पल मरता है| कहीं सागर भी प्यासा रहता है… कभी अश्क पी लेता है छलकने से पहले, कभी खामोश तन्हा सिसकता रहता है| कहीं सागर भी... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[16 Apr 2010 06:47 AM]

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