आइए भ्रमण करें संवेदना के संसार में : एक मुलाकात रंजना जी के साथ !

एक शाम मेरे नाम बात पिछली चौदह जनवरी यानि तीन महिने पहले की है। दोपहर का समय रहा होगा कि अचानक ही मोबाइल की घंटी घनघना उठी। नंबर जाना हुआ ना था सो मैंने सोचा जरूर किसी साथी चिट्ठाकार का ही फोन होगा जिसने जन्मदिन की मुबारकबाद देने के लिए फोन किया हो। फोन कनेक्ट हुआ तो... [पूरी पोस्ट]
writer Manish Kumar
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[16 Apr 2010 04:40 AM]

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