क्यों मुस्काते हो..?
रतन जब मैं सदमे में जीता हूंतब तुम क्यों मुस्काते हो?मंजर है नहीं आज सुहानाक्यों तुम गीत सुनाते हो?पाया नसीबा हमने ऐसाअक्सर तुम कहते मुझसेमैं तो हूं पछताने वालाअब तुम क्यों पछताते हो?जब तक था मन साथ तुम्हारेतुमने दूरी रखी कायमअब हारा हूं थका हुआ...
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इष्ट देव सांकृत्यायन
कविता
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[16 Apr 2010 04:11 AM]



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