हमारा संविधान ही हमारा धर्मग्रन्थ है.

राष्ट्र जागरण बड़ी अजीब स्थिति है की एक साधारण सी बात को समझने समझाने में बड़े बड़े तर्कों का सहारा लेना पड़ रहा है. मोटे तौर पर किसी भी सम्प्रदाय में धर्म ग्रन्थ का दो ही उद्देश्य है. कोई अकेला व्यक्ति किस प्रकार अपने आप को ईश्वर का साक्षी मान इस संसार में अपने [...]... [पूरी पोस्ट]
writer Sulabh

nationalismour lawreligious factजन जागरण | public awareness

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[07 Apr 2010 03:58 AM]

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