बाकी याददाश चली जाये

राज दरबार उनके इश्क में ऐसा उलझे काम-तमाम भूल गए,उनके इशारे छोड़ बाकी सब के सलाम भूल गए।सुन के उनकी बातें खुद के कलाम भूल गए,खो के उनकी जुल्फों में कल की शाम भूल गए।उनकी आँखों से पीने में सारे जाम भूल गए,पूजा उनको इतना अब तो अल्लाह-राम भूल गए।उनकी मोहब्बत के सिवा... [पूरी पोस्ट]
writer raj
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[16 Apr 2010 03:02 AM]

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