जैन साहित्य:प्राचीन इतिहास-24
गतांक से आगे ......अर्धमागधी जैनागम(श्रुतांग-११)१. आचारांग (आयारंग) - इस ग्रन्थ में अपने नामानुसार मुनि-आचार का वर्णन किया गया है। इसके दो श्रुतस्कंध हैं। प्रत्येक श्रुतस्कंध अध्ययनों में और प्रत्येक अध्ययन उद्देशकों या चूलिकाओं में विभाजित है। इस प्रकार...
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HEY PRABHU YEH TERA PATH
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[16 Apr 2010 01:50 AM]



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