पतंजलि योग दर्शन-राग, द्वेष तथा भय का भाव स्वाभाविक (patanjli yog darshan-raag dwesh aur bhay ka bhav)
सुखानुशयी रागः।।हिन्दी में भावार्थ-सुख के भाव के पीछे राग है।दुःखानुशयी द्वेषः।।हिन्दी में भावार्थ-दुःख के भाव के पीछे रहने वाला भाव क्लेश है।स्वरसवाह विदुषोऽपि तथारूढोऽभिनिवेशः।।हिन्दी में भावार्थ-मनुष्य स्वभाव में भय का भाव परंपरा से चला आ रहा है जिसे...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[15 Apr 2010 22:49 PM]



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