क्रांति का बजरा
क्रांति का बजरा चला सवेरे, धूप ढली घिर आये अँधेरेआज उठेंगे रे , भाग्य के सोये मौन चितेरेहांक उठाई वज्र गिराए , बने बनाये सभी मिटाएनिर्दोषों के खून में रंग के , रंग बिरंगे लाल रंगायेमानवता के मिट गए घेरे , ऐसे आये लाल सवेरे ||समता के झांसे में इधर भी ,...
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क्षत्रिय
स्व.श्री तन सिंह जी कलम से
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[15 Apr 2010 21:40 PM]



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