सुमन कल्यानपुर-तीन गीत
गाढ़ी धूप के दिनकभी कभी पुरवाई चलती हैहरे पत्तों वाले छोटे गाछ परबेली नियमित फूलती हैजीनिया के चटख रंगों वाले फूलबाहर काम करते मज़दूरों का हौसला बढ़ाते हैंकोयल अलसुबह ही कूक करचुप ओढ़ लेती हैपहर बीतते न बीततेसाँसे उमसा जाती हैं पत्ता,एक भी नही डोलता जब...
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पारूल
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[15 Apr 2010 21:47 PM]



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