पूँजीवाद-माओवाद: कुछ नोट्स - २

निर्मल-आनन्द हमारे समाज में पूँजीवाद के सकारात्मक पहलू की समझ ग़ैर-मौजूद है। हम हमेशा पूँजीवाद को पिछले समाज के या वर्तमान समाज के नज़रिये से देखते हैं और हो रही उथल-पुथल के लिए उसे ज़िम्मेदार मानते हैं, और गरियाते हैं। जैसे हम हमेशा ये दुहाई देते हैं कि पूँजीवाद यहाँ... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी

राजनीति

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[15 Apr 2010 21:34 PM]

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