मन की तरंग

ARUN (Hindi) अन्दर की आँखेंबाहरी आँखें खुलते ही देखती हैंयहाँ से वहाँमुझसे तुझ कोइधर से उधरनीचे से ऊपरअन्दर की आँखें देख लेती हैं अचानकसबकुछ एक ही दृष्टि में एक ही पल में....................................................... अरुण... [पूरी पोस्ट]
writer Arun Khadilkar
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[15 Apr 2010 21:14 PM]

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