कठफ़ोड़वा

Fulbagiya घूम घूम कर पेड़ों पर हीठक ठक करता मैं कठफ़ोड़वा।चोंच मेरी है बहुत ही लम्बीबहुत ही लम्बी बहुत ही पैनीमोटी से मोटी लकड़ी कोकाटे जैसे लुहार की छेनी।रंग मेरा है गाढ़ा भूराउस पर काली भूरी धारीपर उससे भी अच्छी लगतीमेरे सिर पर कलगी प्यारी।घूम घूम कर पेड़ों पर... [पूरी पोस्ट]
writer हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar
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[15 Apr 2010 21:32 PM]

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