नींद को थपकियाँ देते हुये

कवितायन मुझे,यह भ्रम अक्सर होता है किकोई मेरे दरवाजे पर दे रहा है दस्तक या कभी रात यह भी महसूस होता है कि पुकारा है किसी ने मेरा नाम लेकर या कोई मेरा पीछा कर रहा है बड़ी देर से मुझे सुनायी देती हैं अन्जानी आहटें रह रहकर या किसी मोड़ पर ठिठक जाते हैं कदम मुड़ने से... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
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[15 Apr 2010 20:40 PM]

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