क्या आप ब्लोगिंग नाम के नशे के शिकार हैं ----ज़रा सोचिये ---
सूत न कपास , जुलाहों में लट्ठम लट्ठा ! अनिल पुसदकर जी की यह पोस्ट पढ़कर , बहुत दिनों से जो मैं महसूस कर रहा था और एक बार एक व्यंग लेख के रूप में इशारा भी कर चुका हूँ , आज खुल्लम खुल्ला लिखने का मन कर रहा है ।मेडिकल प्रोफेशन , ब्लोगिंग , कवितायेँ , हास्य...
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डॉ टी एस दराल
ब्लोगिंग
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[15 Apr 2010 20:30 PM]



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