आँख की खिड़की जो खोलो मन का फाटक कर दो बंद

A poetess blog तुमने देखा बस वहीजो आँखों के आगे दिखाकाश देखा होता तुमनेमन के पीछे क्या छुपास्नेह में डूबे हुए मीठे से पलहमने जो सींचा था वो भीगा सा कलदर्द का और प्यार का हर एक लम्हाबन गया था गीत और मीठी ग़ज़लपर तुम्हे क्या तुम वही देखोजो तुमको है पसंदआँख की खिड़की जो... [पूरी पोस्ट]
writer ranjana
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[15 Apr 2010 19:00 PM]

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