किस की ये पतवार है

Ismat Zaidi एक ग़ज़ल पेशे ख़िदमत है ,आप के तब्सेरे मेरी मेहनत की कामयाबी का यक़ीन दिलाएंगे ,शुक्रियाग़ज़ल -____________हो यक़ीं मोहकम, बहुत दुशवार हैअब भी उस के हाथ में तलवार है,जो किसी के काम ही आए नहींहैफ़ ऐसी ज़िंदगी बेकार है,क़त्ल ओ ग़ारत ,ख़ौफ़ ओ दहशत के... [पूरी पोस्ट]
writer इस्मत ज़ैदी
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[15 Apr 2010 15:34 PM]

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