एक नया अंदाज़
बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं जा रहा....बस लगता है कि कुछ लिख ही नहीं पाउंगी...मन में आये भावों को कुछ टूटे शब्द दिए हैं....शायद फिर से कुछ लिख पाऊं ....मन की बेचैनियों ने क़तर दिए हैं पंख मेरी कल्पना के उड़ने की सारी कोशिशें नाकाम हो रही हैं दिखता है...
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sangeeta swarup
कविता ( सर्वाधिकार सुरक्षित )
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[15 Apr 2010 12:57 PM]



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