बेबस इंसान सभी जगह रोता-हिन्दी शायरी (bebas insan sabhi jagah rota-hindi shayri)

दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका वह इसलिये भोले नज़र आते हैंक्योंकि उनकी चालाकियां कोई पकड़ नहीं पाया।उनके घर के बाहर नाम पट्टिका परसाहूकार लिखा हैक्योंकि उनकी चोरी कोई पकड़ नहीं पाया।कौन उठायेगा उंगली उनके काम परपहरेदार को ही अपने घर लगाया। --------------कितने भलमानस इस धरती परविचर रहे... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

hindi satire poem

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[15 Apr 2010 13:17 PM]

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