मन का अन्तर्द्वन्ध..किसी कोने से ...!!!
मेरा तन- मन उचाट क्यूँ है? इस पूरे जहान से , चिड़ियों ने भी समेट लिये , घोंसले मेरे मकान से ।! इंसानों में खुदगर्जी हो गयी ,इस कदर हावी , जड़ भी कहने लगे ,हम अच्छे है इस इन्सान से ।! फिजां की इन सरसराती हवावों में है ,बू साजिश की, इनकी दोस्ती से है कहीं...
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कमलेश वर्मा
मन .इन्सान हवाएं ..कमलेश
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[15 Apr 2010 11:47 AM]



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