..फिर से बचपन के ख्यालों में

शब्द-शिखर कई बार हमें छोटी-छोटी बातें सुकून देती हैं. हम फिर से बचपन में लौटना चाहते हैं. पर क्या करें बड़े होने के आदी जो हो गए हैं. पर शरीर बड़ा होने से क्या हुआ, मन तो अभी भी मानो बचपन की दहलीज पर है. हम बातें जरुर बड़ी-बड़ी करते हैं, पर कई बार हमारी बातों में... [पूरी पोस्ट]
writer Akanksha~आकांक्षा

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[15 Apr 2010 06:50 AM]

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