शब्दों का मदारी

वीर की कलम से शब्दों का मदारी समझते हो, ख़ामोशी को वफादारी समझते हो| रिश्तों में कोई प्यार नहीं है, इन्हें बस जवाबदारी समझते हो| शब्दों का मदारी समझते हो… हाँ सोचता हूँ हर पल तुम्हे, इसे मेरी बेरोज़गारी समझते हो| शब्दों का मदारी समझते हो… बस... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[15 Apr 2010 05:47 AM]

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