देखूं कोई बच्चा तो उसकी ही झलक आए

गुल्लक कपड़ों से मुझे अपने बिटिया की महक आएघर भर के नशेमन से बिटिया की चहक आए मैं तो काम करती हूं चुपचाप रसोई में हर एक बर्तन से बिटिया की खनक आए जाने क्या हो गया है अब मेरी निगाहों कोदेखूं कोई बच्चा तो उसकी ही झलक आए लगता है यही दिल को जब दूर वो होती हैइक बार... [पूरी पोस्ट]
writer राजेश उत्‍साही
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[15 Apr 2010 05:56 AM]

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