कम परिश्रम से अधिक पुण्य कैसे कमाएं

स्वप्नलोक हम बहुधा लोगों को पाप और पुण्य की चर्चा करते देखते हैं । सच कहें तो इनमें से किसी की कोई सर्वमान्य परिभाषा हमने न सुनी, न पढ़ी । भगवतीचरण वर्मा अपने उपन्यास चित्रलेखा में लिख गए हैं : संसार में पाप  कुछ भी नही है, वह केवल मनुष्य के दृष्टिकोण की... [पूरी पोस्ट]
writer विवेक सिंह
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[15 Apr 2010 03:44 AM]

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