अपने दोस्त अनुपम गुप्ता को समर्पित
नाराज है तो लड़ ले , गाली दे , आँखे तरेर ,
खामोश ना रह , मुंह ना फेर !
हममे अदावत कई जन्मों से सही ,
अब अल्लाह रहम ! खुदा खैर !
तेरी गाली मुआफ, मेरी खता मंजूर ,
दोनों उसके सामने होंगे, देर सबेर !
तेरे दोस्तों में मेरा शुमार न सही ,
ज़िन्दगी गुजरी नहीं...
[पूरी पोस्ट]
अतुल प्रकाश त्रिवेदी/ અતુલ પ્રકાશ ત્રિવેદી / অতুল
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[15 Apr 2010 02:59 AM]



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