इंतज़ार, शोखी, प्रेम और गुस्सा (मिर्ज़ा ग़ालिब)
ता फिर न इंतज़ार में, नींद आये उम्र भर,आने का अहद् कर गये, आये जो ख़्वाब में ।अर्थात् "प्रियतम की छेड़ और शोखी देखिए । प्रेमी प्रतीक्षा करते-करते सो गया है । यह सोना भी उनको गवारा नहीं । वह स्वप्न में आये भी तो फिर आने का वादा करके चले गये कि फिर उनकी...
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अनिल कान्त :
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[15 Apr 2010 01:38 AM]



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