कबाड़ीवाला
घर के एक कोने में कर दी हैं इकट्ठीघर के सभी सदस्यों ने — अपनी-अपनी रद्दी.माँ महीनों से जोड़ रही थी जिस कबाड़े को वह कबाड़ा बिक गया — पिता की बिना मर्जी.लास्ट सन्डे न्यूज़पेपर में छपा जो एडवरटायिज़ — "फ्लेट एमआईजी बनेंगे".— खोजते हैं अब उसी को...
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PRATUL
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[15 Apr 2010 01:25 AM]



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